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सरकार के करोड़ों की जमीन पर रसूखदारों का कब्जा

बिना दस्तावेज के खेला जा रहा है  खरीदी बिक्री का खेल

कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में जमीन की अवैध कब्जा करना बेचना कोई नई बात नहीं है, कुछ कब्जाधारी पहले निवास के नाम पर  सरकारी जमीन पर कब्जा करते हैं फिर मौका देखकर उसे मोटी रकम में किसी दूसरे को बेच देते है आज हम बात कर रहे हैं दल्ली रोड स्थित फॉरेस्ट नाका के सामने जहां कुछ रसूखदार व्यापारियों और एक फॉरेस्ट के डिप्टी रेंजर के द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर घर व कॉम्प्लेक्स बनाया गया है। फिर बाद में उस कॉम्प्लेक्स को दूसरे व्यापारी को किराए पर दे दिए हैं मजे की बात तो यह है कि जितने भी कब्जाधारी हैं वह मूलतः भानुप्रतापपुर के निवासी नहीं है सभी कब्जाधारी ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं जो पैसे के दम पर अच्छे खासे सरकारी जमीन पर कब्ज़ा कर बैठे है ।

वही दूसरी तरफ जब भी कोई गरीब व्यक्ति अपने रहने के लिए कोई जमीन में कब्ज़ा करता है तो नगर पंचायत से लेकर राजस्व विभाग तक इतनी गंभीरता से कार्यवाही करते  है जैसे राजस्व विभाग और नगर पंचायत के कर्मचारियों में  राजा हरिशचंद्र की आत्मा आ गई हो, जब बात रसूखदारों के जमीन कब्ज़ा का मामला आते  ही इन दोनो विभागों को सांप सूंघ जाता है । भानुप्रतापपुर में  जब भी नवनिर्माण की बात आती है तो नगर में जमीन न होने की बात होती है ।

बिना पट्टा के जमीन में अवैध कब्जा कर किराया में दे दिया गया जिसमे रिया मोटर्स संचालित है रिया मोटर्स इलेक्ट्रिक टू व्हीलर स्कूटी सेल करती है जिसमे सब्सिडी का प्रावधान है और इस तरह के सरकारी योजनाओं से जुड़ी प्रतिष्ठान चलाने के लिए जमीन और दुकान की पुख्ता कागज़ात जरूरी होती है पर मामले में ऐसे कुछ भी जमीन से जुड़ी कोई भी वैध दस्तावेज नही है ।

जमीन के इस अवैध कब्जे और उससे जुड़ी कारोबार जमकर फल फूल रही है लेकिन कोई भी प्रशासनिक अमला इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है । जिसका फायदा बाहर के कारोबारी स्थानीय लोगों के अधिकार हनन कर व्यापार कर रहे है ।

इस रिपोर्ट में ऐसे कब्ज़ा धारी की भी बात करते है । जो तीन दशक पहले उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ में रहने खाने और व्यापार करने के लिए आए लेकिन आते ही सबसे पहले उन्होंने दल्ली रोड फॉरेस्ट नाका के सामने लगभग 5 डिसिमल से अधिक जगह पर कब्जा कर लिया जो यहां के स्थाई लोगों का अधिकार का हनन  है यहां (भानुप्रतापपुर) में कब्जा करने के बाद ग्राम भानबेड़ा में भी अवैध रूप से जमीन कब्ज़ा किया और वही  आज उनका निवास है और भानुप्रतापपुर की जमीन में कॉम्प्लेक्स और घर को किराए में दे दिया गया है । जब इस मामले में कब्जाधारी के रिश्तेदार जितेंद्र पांडेय  (भाजपा के मीडिया प्रभारी) बताया जा रहा  हैं पत्रकारों ने  जितेन्द्र पांडेय से बात किया  तो वह सीधा पत्रकारों पर ही राजनीतिक धौंस जमाने लगे यानी समझा जा सकता है डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में आते ही भाजपा के जितेंद्र पांडेय जैसे कार्यकर्ता खुद को तुर्रमखान समझ बैठे है ।  

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