लोकेशन…भानुप्रतापपुर भूमाफियाओं पर मेहरबान राजस्व विभाग…चारागाह की जमीन पर चल रहा है खरीदी बिक्री का खेल…
कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में भू-माफियाओं द्वारा खुलेआम नियमों को ताक में रखकर खरीदी बिक्री किया जा रहा है, और राजस्व विभाग के पटवारी, आर. आई. (राजस्व निरीक्षक) जमकर साथ दे रहे है। जिससे भानुप्रतापपुर में जमीन दलालों की बल्ले बल्ले हो रही है क्यूंकि यहाँ प्रशासनिक उदासीनता के चलते सारे नियम कायदे गट्टर के नाली में डाल कर बहा दिये जाते है । और सरकारी जमीनों को रजिस्ट्रार, पटवारी और आर आई जैसे लोगो की छत्रछाया मे भू-माफियाओं का धंधा फल फूल रहा है लेकिन मजाल है राजस्व विभाग के सम्बंधित उच्च अधिकारी भू-माफियाओं पर कोई कार्यवाही कर सके ।
ताजा मामला भानुप्रतापपुर से लगे ग्राम चौगेल का है जहां सरकारी ज़मीन की खरीदी बिक्री कर जमीन दलाल मालामाल हो रहे है जिसका सीधा फायदा राजस्व विभाग के पटवारी और आर आई को मिल रहा है । और सरकार को राजस्व से चुना लगाया जा रहा है ग्राम चौगेल के दल्ली रोड स्थित जमीन की खरीदी बिक्री किया गया है जमीन पहले 1940 – 1941 और 1961 – 1962 से लेकर 1987 तक सरकारी रिकार्ड में खसरा नंबर 157/2 चारागाह मे दर्ज था 1987 -88 में रिनंबरिंग किया गया जिसके बाद से चारागाह भूमि का खसरा नंबर दो भाग में बंट गया 292/2 और 292/3 । चारागाह जब शासन के नियमानुसार चारागहन की

जमीन को कोई व्यक्ति निजी पट्टा या कब्जा नहीं कर सकता पर चौगेल के मामले में इसका उल्टा कार्य हुआ है मिली जानकारी के अनुसार जमीन के कब्जाधारी दयाराम पिता प्रभुदयाल को ग्रामीणों ने रहने खाने के लिए जमीन दिया था पर दयाराम के पुत्र तिजुराम ने गलत तरीका से सरकारी रिकॉर्ड मे चढ़वा दिया गया और खोमचन्द सोनी पिता प्रभाकर सोनी को बेच दिया गया । जब की चारागाह की जमीन छत्तीसगढ़ में चारागाह (गोचर) की जमीन सरकारी संपत्ति और सामुदायिक संपत्ति होती है, जिसे निजी तौर पर बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता, यह पूरे समाज के लाभ के लिए निस्तारी भूमि के रूप में आरक्षित है, जिस पर कब्जा करना या बेचना गैरकानूनी है, चारागाह की भूमि सामुदायिक संपत्ति होती है जो सरकार के अधीन होती है जिसे कोई भी व्यक्ति न कब्जा कर सकता है न बेच सकता है । लेकिन ग्राम चौगेल में चारागाह भूमि की 1987 -88 में रिनंबरिंग के बाद दयाराम के नाम सरकारी रिकार्ड में चढ़ा दिया गया और चारागाह की रिकॉर्ड हटाकर भूस्वामी बना दिया गया । सरकारी रिकार्ड में दयाराम पिता प्रभु दयाल नाम कर दिया गया । उसके बाद उस जमीन को संबलपुर निवासी खोमचंद सोनी पिता प्रभाकर सोनी को बेच दिया गया जमीन की इस काली खेल में आरआई , पटवारी और रजिस्ट्रार की भूमिका सन्दिग्ध है क्योंकि 1987 – 1988 के पूर्व सभी सरकारी रिकार्ड भूमि में चारागाह दर्ज कर राजस्व विभाग की मनमानी से सरकारी संपत्ति को जमीन दलाल और सरकारी नुमाइंदे मिल कर लूट रहे है ।
पटवारी प्रफुल्ल बघेल ने जमीन की प्रतिलिपि बनाया और रजिस्ट्रार ने जमीन की रजिस्ट्री कर दी। जब की ऑनलाइन रजिस्ट्री में भूमि का पट्टा संलग्न ही नहीं किया गया है ।
यदि ईमानदारी से राजस्व विभाग जांच पड़ताल करें तो भू-माफियाओं की सारी पोल पट्टी खुल जाएगी ।




